वीर का सुबह वाला हिम्मत का जादुई घोल
आयु 3–5
वीर नाश्ते की मेज़ को बुदबुदाती जादुई प्रयोगशाला बना देता है, जिसमें वह जूस, शहद, सीरियल और बगीचे की पंखुड़ियाँ मिलाकर प्ले-स्कूल के पहले दिन से पहले सुबह का हिम्मत वाला घोल बनाता है।

रसोई में धूप सुनहरे पानी की तरह बह रही थी। वीर ने धारीदार एप्रन बाँधा, और नीचे से उसके जूते झाँक रहे थे। “आज प्ले-स्कूल का बड़ा दिन है,” उसने धीरे से कहा। उसके पेट में हल्की-सी घबराहट हो रही थी। “घोलो ज़ोर से, घोलो ख़ूब, सुबह भर हिम्मत बनी रहे बस, हर दम!”
छपाक! धूप वाला जूस अंदर गिरा, नारंगी और चमकदार, गोल-गोल घूमता हुआ। वीर जादुई चम्मच से धीरे-धीरे गोल चक्कर लगाकर घोलने लगा। पिपी घोंघे ने ख़ुश होकर कहा, “वाह! ये तो छोटे-से सूरज की तरह चमक रहा है!”
फिर आया शहद, धीरे-धीरे बहता हुआ सुनहरा, जैसे रोशनी की कोई नदी बह रही हो। “एक बहादुर दिल के लिए मिठास की लहराती धार,” वीर ने कहा और शहद को कटोरे में गोल-गोल गिरते देखता रहा।


