आरव और कहानी के खोए पन्ने की खोज
आयु 3–5
जब एक शरारती हवा आरव की सबसे प्यारी कहानी की किताब से उसका खुशियों वाला अंत उड़ा ले जाती है, तो आरव रंगीन पन्नों की दुनिया में उतर जाता है, ताकि आख़िरी रोशनी बुझने से पहले एक बहादुर नन्हे सिपाही और एक प्यारी शेरनी के साथ उसे ढूँढ सके।

हर शाम, जब बत्तियाँ धीमी होने लगतीं, आरव अपनी पढ़ने वाली कुर्सी में सिमटकर बैठ जाता और कहानी की चमकती किताब देखता। यह उसकी सबसे प्यारी किताब थी, क्योंकि उसका अंत बड़ा सुहाना था, महल के छोटे-से कोने में खुशियों का ठिकाना था। तभी एक शरारती हवा सरसराती हुई आई, खिड़की खड़खड़ाई, पन्ने फड़फड़ाए, और आख़िरी पन्ने को उड़ाकर आँखों से ओझल कर गई!
“लौट आओ!” आरव चिल्लाया और उछलकर हाथ बढ़ाया। पन्ना घूमता हुआ किताब के कवर के अंदर चला गया, और आरव खुद को रोक ही न पाया! वह उल्टा-पुल्टा लुढ़कता हुआ नीचे गिरा, एक रंगे-पुते, पन्नों जैसी चमकती दुनिया में।
आरव रंगीन घास पर धीरे से आ गिरा। ऊपर आसमान में ब्रश से बनाए बादल तैर रहे थे। तभी एक नन्हा-सा सूरमा मार्च करता हुआ आया और सबको हाथ हिलाने लगा। “मैं हूँ सर पन्नापलट!” उसने कहा। “हमारा खुशियों वाला अंत उड़ गया है! क्या तुम उसे ढूँढने में हमारी मदद करोगे? पन्ना-पन्ना ढूँढेंगे, अपनी राह पा जाएँगे!”


