विवान और नदी का गुनगुनाता कंकड़

आयु 3–5

साफ़ पहाड़ी नदी के किनारे सूखे पत्थरों पर पत्थर उछालते हुए, विवान को एक चिकना नीला कंकड़ मिलता है, जो पानी को छूते ही मस्ती भरी लोरी गुनगुनाता है — पर तभी, जब वह उसे हौले से पकड़ना और धीरज से सुनना सीख ले।

"विवान और नदी का गुनगुनाता कंकड़" का कवर

ऊँची पहाड़ियों पर, जहाँ चीड़ के पेड़ झूमते हैं, विवान और खेलने आए। पानी पर धूप, पत्थरों पर धूप — संगीत से भरी यह घाटी आज उन्हीं की थी।

धूप में छोटे-छोटे चपटे पत्थर गरम पड़े थे। विवान ने सबसे अच्छा पत्थर चुना — चिकना, गोल और मज़ेदार! ने हरी छोटी थैली थपथपाई और कहा, "इसे धीरे से उछालना, और सुनना — पानी हमेशा गुनगुनाकर जवाब देता है।"

छपाक, छपाक, छपाक! पत्थर धारा के आर-पार उड़ चले। विवान ने जो भी पत्थर फेंका, वह टन, टन, टन करता गया। "छपाक, छपाक, छपाक!" विवान खिलखिलाकर हँसा और धूप में नाचती लहरों को देखता रहा।

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