सिया का काँच वाला किला
आयु 3–5
चमचमाते समुंदर किनारे सिया चिकने सीग्लास के खज़ाने इकट्ठा करती है, ताकि एक शर्मीले हर्मिट केकड़े के लिए चमकता हुआ किला-घर बना सके।

सिया फुदकती हुई समुंदर किनारे चली, उसकी रंग-बिरंगी टोकरी झूल रही थी। धूप रेत पर, लहरें पत्थरों पर — आज कौन-से खज़ाने मिलेंगे? ठंडी गीली रेत पर उसकी चप्पलें कुरकुर करती रहीं, और वह काँच और सुनहरे खज़ाने ढूँढती रही।
वो रहा! सीग्लास का एक टुकड़ा, लोरी जैसा चिकना, नए पत्तों जैसा हरा। सिया ने उसे ऊपर उठाया और रोशनी में घुमाकर देखा। “चिकना और ठंडा — किले के लिए बिल्कुल सही!”
चिकना, चिकना, चमकता काँच, कोमल हाथों से बनेगा पक्का महल! सिया गुनगुनाई, और ठंडे टुकड़े एक-एक करके टोकरी में सरकाती गई — एक, फिर दो, फिर तीन।


