पीहू और कंबल वाले किले की रानी
आयु 3–5
बारिश वाले शनिवार को एक चुलबुली चार साल की बच्ची अपने कमरे को राज्य घोषित कर देती है, जहाँ इकलौता कानून सोने से पहले की कहानी है और इकलौता सिक्का एक झप्पी।

टप-टप-टप! बारिश की एक बूँद शीशे पर फिसलती चली गई। पीहू ने उदास आसमान को देखकर मुँह बना लिया। पर रानी बारिश के दिन उदास नहीं बैठती — रानी तो अपना राज्य बनाती है!
चोगा पहन लिया! कमरबंद बाँध लिया! “अब बस मेरा ताज चाहिए,” पीहू बोली, “और कोई शानदार-सी चीज़, जिसे मैं लहराकर कहूँ... सुनो, सुनो, सुनो!”
ऊपर उठीं रज़ाइयाँ! पीहू और पॉकेट्स ने रेशमी कंबल कुर्सियों पर डाल दिए। वे उन्हें खींचते, दबाते और सँवारते रहे, और देखते-देखते जादू की तरह नरम दीवारें खड़ी हो गईं।


