मायरा और शहद की रानी अंबरी का सुनहरा महल
आयु 3–5
एक जादुई छत्ते में बुलाई गई मायरा — चार साल की बच्ची, जिसके उलझे लाल बाल, चेहरे पर झाइयाँ और गोरा रंग है — कोमल काम करने वाली मधुमक्खियों से मिलती है, जो मीठे मकरंद को सुनहरे शहद में बदलती हैं, और सीखती है एक प्यारा नियम: देखो, छुओ मत।

मायरा ने लैवेंडर के फूल पर एक रोएँदार मधुमक्खी देखी। वह थोड़ा पीछे ही रुकी रही, ताकि मधुमक्खी को खूब जगह मिले। “आओ, हमारा छत्ता देखो,” जैसे मधुमक्खी गुनगुनाई। फिर पराग का एक झोंका उड़ा, और मायरा छोटी होती गई, होती गई, मधुमक्खी जितनी नन्ही।
बीज जितनी छोटी मायरा ने ऊपर सुनहरे मोम का एक दरवाज़ा देखा। गूँजू मधुमक्खी बोला, “स्वागत है, दोस्त! आओ, देखो हम मधुमक्खियाँ क्या-क्या सँभालकर रखती हैं।” मायरा ने थूक गटका, फिर गहरी साँस ली, और हिम्मत करके अंदर चली गई।
अंदर की दीवारें सुनहरी थीं, छह कोनों वाले खानों की कतारें ही कतारें। छत्ते की खिड़कियाँ नन्हे सूरज जैसी चमक रही थीं, और मायरा ठिठक गई। एक मधुमक्खी तेज़ी से पास आई, तो मायरा के कंधे उछल गए। गूँजू ने धीरे से कहा, “सँभलकर! हम बस देखते हैं कि हमारा महल कैसे बड़ा होता है।”


