सिया का जादुई दिल वाला पॉकेट आईना
आयु 3–5
जब सिया को एक पुराना पीतल का आईना मिलता है, जो दोस्तों के एहसास चमकते रंगों में दिखाता है, तो वह चुपचाप नीले दिल और अकेले धूसर बादल को पहचानना सीखती है और सही वक़्त पर एक झप्पी देती है।

गोल-गोल छतों और गलियों वाले एक गाँव में सिया को एक पुराना आईना मिला। पीतल का था, उस पर बेलें खुदी थीं। सिया ने उसे सीने से लगा लिया, जैसे कोई खज़ाना हो।
सिया ने आईना खोला तो वाह, क्या नज़ारा था! उसमें सिर्फ़ उसका चेहरा नहीं, रोशनी का एक नन्हा डिब्बा-सा था! कभी झिलमिल, कभी टिमटिम, रंग ही रंग। यह आईना तो मन की गहराई तक देख लेता था।
“दिल वाला आईना!” वह खुशी से चहकी। “मैं हर एहसास ढूँढ़ निकालूँगी, चाहे छुपा हो या चमकीला!” फिर सिया ज़ंजीर झुलाती, खुशी से उछलती-कूदती चल पड़ी। सही वक़्त पर झप्पी, यह उसे साफ़ दिख रहा था!


