दिया के तारों वाले मोज़े
आयु 3–5
चटकती आग के पास दिया को चिंता है कि तारों की ऊन ख़त्म हो जाएगी और हर ठिठुरते पंजे तक गर्माहट नहीं पहुँचेगी, जब तक कि वह एक होशियार तरीका नहीं ढूँढ लेती जिससे ऊन आख़िरी मोज़े तक पहुँच जाए।

बर्फ़ ने जंगल को अपनी सफ़ेद चादर में कसकर लपेट लिया। रात की हवा खिड़कियों को खड़खड़ा रही थी। अंदर आग के पास, नन्ही और गरम-गरम, दिया बैठी थी, तूफ़ान भर बुनने को तैयार।
दिया ने चाँदी जैसी पतली तारों की रोशनी समेटी। “काश,” वह धीरे से बोली, “शुरू करने भर को तो काफ़ी हो।” टोकरी छोटी लग रही थी। रात बहुत लंबी लग रही थी। पर उसकी सलाइयाँ अपना छोटा-सा गीत गाने को तैयार थीं।
खट-खट, खट-खट चलीं सलाइयाँ, तेज़ और चमकीली। आग की रोशनी में एक फंदा सीधा, दो फंदे उलटे। एक नन्हा मोज़ा बनता गया, चाँदी और सुनहरी धारियों वाला। ठंड से लड़ने वाला पहला नन्हा मोज़ा।


