पीहू की मखमली मीनार और शुभरात्रि का जादू
आयु 3–5
आधी रात जैसी नीली मीनार वाले शयनकक्ष में नींद से भरी नन्ही खोजी पीहू हर खिलौने और कमरे के हर कोने पर एक छोटा, चमकीला, शांत करने वाला जादू करती है, और आख़िर में गाते हुए तारे उस पर नींद का जादू कर देते हैं।

ऊँची मखमली मीनार में पीहू ने बड़ी-सी जम्हाई ली। “शुभरात्रि के जादू का समय हो गया!” उसने सुनहरी तारे वाली छड़ी ऊपर उठाकर कहा। आज रात वह कमरे के हर कोने पर जादू करेगी, वह भी अकेले।
सबसे पहले बबलू भालू की बारी आई, जो कालीन पर एक तरफ़ लुढ़का पड़ा था। पीहू ने छड़ी को अपने सिर के पास एक तरफ़ घुमाया, सर्र-सर्र, झिलमिल! “तुम्हारे लिए शुभरात्रि का जादू, बबलू,” उसने फुसफुसाकर कहा, और भालू का नन्हा लबादा नरम रोशनी से झिलमिला उठा।
बबलू की बटन जैसी आँखें धीरे-धीरे भारी होने लगीं। “जादू हो गया, अब सब शांत,” पीहू ने कहा और नन्हे भालू को प्यार से अपनी बाँह में समेट लिया। एक खिलौना हो गया, अभी पूरी मीनार बाक़ी है! सर्र-सर्र, झिलमिल!


