विवान और अटारी की आधी रात वाली आवाज़

आयु 6–8

हर रात ठीक दस बजे एक रहस्यमयी धम-धम विवान के कमरे की छत हिला देती है, और उसे आटे, पैरों के निशानों और ध्यान से जुटाए सुराग़ों की मदद से अटारी में छिपी आधी रात की इस पहेली को सुलझाना है।

"विवान और अटारी की आधी रात वाली आवाज़" का कवर

धम। धम-धम। हर रात ठीक दस बजे विवान के कमरे की छत के ऊपर कुछ खटकता था। “फिर वही आवाज़!” वह फुसफुसाया और कंबल थोड़ा नीचे खिसकाकर ऊपर झाँकने लगा। मूँछू बिल्ली एकदम सीधी बैठ गई, उसके कान आवाज़ की ओर हिल रहे थे। विवान ने सोच लिया, आज रात इस रहस्य का पता लगाकर ही रहेगा।

“मुझे अपने कमरे के ठीक ऊपर धम-धम की आवाज़ आती है,” विवान ने नाश्ते पर मेज़ पर चम्मच बजाते हुए कहा। मेज़ पर एक मग खनका। “क्या रोज़ रात उसी वक़्त?” उसके पास से किसी ने पूछा। “ठीक दस बजे,” विवान ने अपनी छोटी-सी नोटबुक निकालते हुए कहा। “मैं पता लगाकर रहूँगा कि यह क्या है।”

उस दोपहर विवान ने थोड़ी-सी मदद से अटारी की चरमराती सीढ़ी नीचे खींची। “सीढ़ियों पर सँभलकर,” पीछे से किसी ने सीढ़ी को पकड़कर कहा। ऊपर गोल खिड़की से धूल भरी रोशनी आ रही थी, और पुराने संदूक अँधेरे में दुबके थे। “आवाज़ें यहीं से आती हैं,” विवान ने फुसफुसाकर कहा, उसके हाथ में बड़ा करने वाला शीशा तैयार था।

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