अर्जुन और संग्रहालय की हड्डी की चोरी का राज़
आयु 6–8
जब डायनासोर वाले हॉल से एक कीमती जीवाश्म गायब हो जाता है, तो आठ साल के अर्जुन को अंदाज़ों से नहीं, नंबरों से पता लगाना है कि असल में क्या हुआ था।

शनिवार की सुबह का मतलब था बस एक चीज़: संग्रहालय में छोटे जासूसों का क्लब! अर्जुन विशाल सौरोपॉड के कंकाल के पास से दौड़ता हुआ निकला, उसका आतिशी शीशा डोरी पर उछल रहा था। क्लब में नेहा उसकी सबसे अच्छी साथी थी, उसकी नोटबुक हमेशा तैयार रहती थी। “आज की पहेली बहुत मज़ेदार है,” उसने फुसफुसाकर कहा। रस्सी के पीछे एक ट्रॉली खड़ी थी, जिसकी मखमली ट्रे में नंबर लगे जीवाश्म पीली रोशनी में चमक रहे थे।
“रुको,” नेहा अचानक रुककर बोली। “चौथी ट्रे खाली है!” अर्जुन ने चेहरा ऊपर उठाया, उसकी आँखें फैल गईं, और वह सीधा पीतल के उस छोटे टैग को देखने लगा जिस पर नंबर तो था, पर हड्डी नहीं थी। “पैर के अँगूठे की हड्डी!” वह हाँफकर बोला। “सौरोपॉड के पैर के अँगूठे की बड़ी हड्डी गायब है!” स्वयंसेवक गोपाल जी घबराकर दौड़े आए, उनके हाथ ट्रॉली के पास बेचैनी से हिल रहे थे।
“मैं तो बस एक पल के लिए हटा था!” गोपाल जी अपने एप्रन की डोरी मरोड़ते हुए बोले। “क्या किसी ने इसे चुरा लिया?” नेहा ने अपनी नोटबुक देखकर माथे पर बल डाले। “अभी नहीं,” उसने दृढ़ता से कहा। “पहले नंबर जाँचते हैं। हर जीवाश्म का एक दर्ज नंबर होता है, और हर दराज़ का भी वही नंबर होता है।” अर्जुन ने सिर हिलाया, उसका आतिशी शीशा चमक उठा। “नंबर झूठ नहीं बोलते।”


