रोहन और मंच के पीछे का गायब ताज

आयु 6–8

स्कूल का नाटक शुरू होने से कुछ ही मिनट पहले मंच के पीछे से शाही ताज गायब हो जाता है, और पर्दा उठने से पहले रोहन को एक-एक शीशे से सुराग जोड़कर पूरा घटनाक्रम सुलझाना है।

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पर्दा उठने में बस दस मिनट बाकी थे! मंच के पीछे मधुमक्खी के छत्ते जैसी भिनभिनाहट थी। तभी ओम कपड़ों के रैक के बीच से दौड़ता हुआ आया, उसका चेहरा पीला पड़ा हुआ था। “ताज!” वह चिल्लाया। “शाही ताज गायब है!” रोहन चलते-चलते वहीं ठिठक गया, उसके गले की डोरी से लटका मैग्निफ़ाइंग ग्लास झूल रहा था। पहले ही दृश्य में वह ताज चाहिए था, और वह हवा में गायब हो गया था।

“ठीक है,” रोहन ने कहा और मखमली गद्दी के पास घुटनों के बल बैठ गया, जहाँ ताज रखा होना चाहिए था। “ताज अपने आप तो चलकर नहीं जाता। किसी ने उसे हटाया है, या किसी चीज़ ने। चलो पता लगाते हैं कि यहाँ आख़िरी बार कौन था।” उसने अपनी नोटबुक निकाली। नादिया ने पक्के इरादे से सिर हिलाया। “आज इस मेज़ के पास से जितने भी कलाकार गुज़रे, मैं सबकी सूची बनाऊँगी।”

पहले ड्रेसिंग रूम के शीशे के चारों ओर चमकते बल्ब लगे थे। रोहन ने शीशे में दिखती तस्वीर को ध्यान से देखा। “यह शीशा सामान वाली मेज़ की तरफ़ है,” उसने कहा। “यहाँ खड़ा कोई भी इंसान ताज को देख सकता था, और शायद उसे उठा भी सकता था।” नादिया ने चुटकी बजाई। “मुख्य कलाकार दस मिनट पहले यहीं तैयार हो रहे थे!”

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