वीर और फुसफुसाती गुफा की गूँज
आयु 6–8
जब पर्यटकों वाली विशाल गुफा के गहरे अँधेरे से भुतहा आवाज़ें फुसफुसाती लगती हैं, तो वीर अपनी नोटबुक उठाकर हर गूँज का समय नापता है, उसकी देरी का हिसाब लगाता है, और नक्शा बनाता है कि ध्वनि-तरंगें ठोस चट्टान और छिपी हवा की नलियों से कैसे सफ़र करती हैं।

“फुसफुसाती खोह में आपका स्वागत है!” घुँघराले बालों वाली गाइड मीरा ने पुकारा। उसने जंगल जैसी हरी बंडी पहन रखी थी। उसने अपनी लालटेन चमचमाती सुरंग की ओर घुमाई। वीर ने अपनी नोटबुक कसकर पकड़ रखी थी। उसमें उसने ढेर सारे रहस्य लिखे थे और उसे उन पर बहुत गर्व था। उसे उम्मीद थी कि गर्मी की छुट्टियाँ खत्म होने से पहले यह गुफा उसे कोई असली रहस्य ज़रूर देगी। कहीं बहुत गहराई में कुछ गूँज रहा था... जैसे कोई आवाज
आगे रास्ते में नीचे उतरते ही पूरे कक्ष में एक धीमी, भारी कराह गूँजने लगी। “ऊऊऊ... ऊऊऊ...” पिप डर के मारे काँपता हुआ वीर के कॉलर के पीछे छिप गया। “यह भूत है, मुझे पक्का पता है!” लेकिन वीर भागा नहीं। उसने अपनी पेंसिल निकाली। “भूत तय समय पर नहीं गूँजते,” वह बोला। “चलो, समय नापते हैं।”
“एक... दो... तीन...” वीर हर भुतहा कराह के बीच के सेकंड गिनने लगा और नोटबुक में संख्याएँ लिखता गया। “यह हर आठ सेकंड में लौटती है,” उसने बताया। मीरा ने भौंहें उठाईं। “इतना समय का पाबंद भूत? इतने सालों से यहाँ गाइड हूँ, ऐसा तो कभी नहीं सुना।”


