आरव और बाज़ वाले गुमशुदा बैनर का राज़
आयु 6–8
पेप रैली से कुछ घंटे पहले जब चैंपियनशिप वाला बैनर ग़ायब हो जाता है, तो आरव नीले रंग के नन्हे कणों का पीछा करके पूरे स्कूल को पता चलने से पहले ही राज़ सुलझा देता है।

पेप रैली का दिन था! जिम सुनहरी और गहरी नीली झंडियों से सजा हुआ था, और सब बेसब्री से चैंपियनशिप वाले बैनर के खुलने का इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन जैसे ही कोच दीक्षित हुक की तरफ़ बढ़े, उनका हाथ हवा में ही रुक गया। "वो नहीं है," कोई धीरे से बोला। आरव का दिल धक से रह गया। दहाड़ते हुए बाज़ वाला वह बैनर ग़ायब हो चुका था।
"किसी ने उसे चुरा लिया!" आरव ने अपना गोल चश्मा ठीक करते हुए कहा। आरव ने हाथ उठाकर उसे रोका। "अभी हमें यह पता नहीं है," उसने शांत होकर कहा। "ध्यान से देखो। दो बार देखो। पहले हम सुराग़ ढूँढेंगे।" वह खाली हुकों के पास घुटनों के बल बैठ गया और अपना पीतल का आतिशी शीशा निकालकर फ़र्श को इंच-इंच देखने लगा।
वह रहा! जहाँ बैनर टँगा था, ठीक वहीं फ़र्श पर आसमानी नीले रंग के नन्हे कण चमक रहे थे। आरव पास झुककर देखने लगा। "यह स्कूल वाला रंग नहीं है," उसने कहा। "यह ज़्यादा गाढ़ा है, जैसा ड्रामा रूम के ईज़लों पर लगा होता है।" आरव की आँखें चश्मे के पीछे बड़ी-बड़ी हो गईं।


