विवान और पानी में डूबा खिलौनों का संदूक
आयु 6–8
जब विवान का प्यारा खिलौनों का संदूक आँगन के तालाब की तली में डूब जाता है, तो उसे जग, गणित और जिज्ञासा से भरे अपने आवर्धक शीशे की मदद से उसे वापस ऊपर लाने का तरीका खोजना पड़ता है।

विवान को पहेलियाँ किसी भी चीज़ से ज़्यादा पसंद थीं, और सबसे ज़्यादा वह भारी लाल खिलौनों का संदूक, जिसमें उसके सारे गैजेट रखे थे। हर सुबह वह उसे घसीटकर घाट पर ले आता और अपने खज़ाने छाँटता। उसके गले में मैग्नीफाइंग ग्लास झूलता रहता। बरामदे से हँसकर बोले, “सँभलकर, यह संदूक बहुत भारी है!”
तभी चर्र! घाट का एक तख़्ता हिल गया। संदूक झुका, फिसला और धड़ाम से गहरे हरे तालाब में गायब हो गया! विवान रेलिंग के पास जम-सा गया। “मेरा संदूक!” वह चिल्लाया। पानी में फैलती लहरों को देखकर बिस्किट ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा।
लंबे रबर के जूते पहने, कीचड़ में छप-छप करते जल्दी से नीचे आए। गँदले पानी में झाँककर बोले, “घबराओ मत। संदूक खोया नहीं है, बस आराम कर रहा है। पर वह इतना गहरा और भारी है कि हाथों से नहीं निकलेगा। उसे निकालने के लिए हमें कोई चतुर तरकीब सोचनी होगी।”


