अर्जुन और पुराने टाउन हॉल का गुप्त कमरा
आयु 6–8
जब अर्जुन को पुराने टाउन हॉल की बाहरी दीवार और भीतरी गलियारे के बीच चार फ़ुट का अजीब फ़ासला दिखता है, तो वह 1890 के धूल भरे नक्शे को किसी गुप्त संकेत की तरह पढ़ता है और एक ऐसे कमरे का पता लगाता है जिसमें सौ साल से कोई नहीं गया था।

“संख्याएँ कभी झूठ नहीं बोलतीं,” अर्जुन ने धीरे से कहा और रिकॉर्ड रूम की मेज़ पर बड़ा-सा नक्शा फैला दिया। सरसों के रंग की कॉर्डरॉय जैकेट और गहरी हरी पैंट पहने अर्जुन ने काग़ज़ को सीधा किया। उससे पुरानी बारिश और पेंसिल की धूल की महक आ रही थी। टिन्नी कूदकर कुर्सी पर चढ़ गई और नक्शे को सूँघने लगी। उसकी नाक फड़क रही थी, जैसे सौ साल के राज़ उन लकीरों में दबे हों।
फ़ेरो काका की चाबियाँ खनकीं और उन्होंने कोको का मग मेज़ पर रख दिया। “ज़्यादातर लोगों के लिए तो यह बस पुराना काग़ज़ है,” वे सपाट आवाज़ में बोले। “मैं तो इस पर पूरी दोपहर बर्बाद नहीं करता।” पर अर्जुन ने हार नहीं मानी। वह इमारत की बाहरी दीवार पर उँगली फिराता रहा, एक-एक कोना पार करता हुआ, जैसे किसी रास्ते पर चल रहा हो। “संख्याएँ कभी झूठ नहीं बोलतीं,” उसने फिर बुदबुदाया।
अर्जुन ने फ़ीता उठाया और बाहर के लंबे गलियारे में चल पड़ा। एक-एक क़दम सँभालकर उसने सामने के दरवाज़े से पीछे की दीवार तक नापा। “बयालीस फ़ुट,” उसने ऐलान किया और संख्या लिख ली। तभी टिन्नी गलियारे के बीच एक जगह अचानक रुक गई। वह ज़ोर-ज़ोर से सूँघ रही थी और उसकी पूँछ एकदम अकड़कर सीधी हो गई थी।


