पीहू और शहद वाले मसाले का राज़
आयु 6–8
जब बड़े जिंजरब्रेड बेक-ऑफ़ से ठीक एक दिन पहले सुबह हनीकॉम्ब बेकरी का खास मसाला मिश्रण और उसका रेसिपी कार्ड, दोनों गायब हो जाते हैं, तो पीहू को अपनी तेज़ नाक, एक ताल वाले शीशे और थोड़ी जासूसी समझ से तीन खास मसाले सूँघकर पहचानने हैं और भागे हुए रेसिपी कार्ड को ढूँढना है, ओवन ठंडे पड़ने से पहले।

“पीहू! मसाले का मिश्रण गायब है!” की आवाज़ काँप गई। वह काउंटर पर रखे खाली डिब्बे को देख रही थीं। बेक-ऑफ़ कल था, और उस खास मिश्रण के बिना जिंजरब्रेड बन ही नहीं सकती थी। पीहू ने अपना कोको का मग नीचे रखा और गले में बँधा छोटा-सा लाल रूमाल कस लिया। “घबराइए मत, । मेरी नाक सब पता लगा लेती है! मैं अभी पता करती हूँ कि क्या हुआ।”
पीहू ठीक से देखने के लिए काउंटर पर चढ़ गई। मसालों की अलमारी लगभग खाली थी। बस कुछ अकेले डिब्बे बचे थे। “कुछ तो गायब है, पक्का,” उसने कहा और खाली जगहों पर उँगली फिराई। बिस्किट एक बार भौंका। वह कमरे के उस पार रखे ओवन की तरफ़ पूँछ हिला रहा था, और अपने आप से बड़ा खुश दिख रहा था।
“पहला सुराग़: असल में क्या बचा है?” पीहू ने कहा और तीन छोटे डिब्बे काउंटर पर कतार में रख दिए। दालचीनी की डंडियाँ, सूखी अदरक की जड़ और छोटी-छोटी हरी फलियाँ एक साथ रखी थीं। मिश्रण में ठीक यही तीन मसाले तो लगते थे! “पहेली के आख़िरी टुकड़े यही हैं,” उसने कहा। “अब बस पक्का करना है, एक-एक सूँघकर।”


