मायरा और उलटी लिखावट की पहेली

आयु 6–8

जब मायरा को एक पुरानी डायरी मिलती है जो पूरी तरह अजीब उलटी लिखावट में लिखी है, तो उसे हाथ के शीशे और रोशनी के चतुर कोणों की मदद से सौ साल से छिपा एक भूला हुआ इतिहास खोलना पड़ता है।

"मायरा और उलटी लिखावट की पहेली" का कवर

एक गर्म दोपहर मायरा अपनी जैकेट की जेब में पीतल के किनारे वाला शीशा रखकर अटारी की सीढ़ी चढ़ी। संदूकों के ढेर के पीछे, आविष्कारकों की पुरानी किताबों के पास, चमड़े की जिल्द वाली कोई चीज़ झाँक रही थी। “तुम क्या छिपा रही हो?” उसने धीरे से कहा और धूल से भरी, फटी जिल्द वाली एक डायरी बाहर निकाल ली।

मायरा ने डायरी खोली और हैरान रह गई। हर पन्ने पर अजीब, घुमावदार अक्षर थे जो उलटी तरफ़ भागते थे, जैसे कोई ऐसी पहेली जिसे आज तक किसी ने हल नहीं किया। “मुझसे तो एक भी शब्द नहीं पढ़ा जा रहा,” उसने उन अजीब आकृतियों पर उँगली फिराते हुए कहा।

मूँछू उछलकर मायरा के पास संदूक पर आ बैठा। उसने डायरी को सूँघा और आविष्कारकों की एक पुरानी किताब को धक्का देकर नीचे गिरा दिया। किताब एक ऐसे पन्ने पर खुल गई जिस पर अजीब-सा चित्र बना था। “इसे तिरछा करके देखो,” मायरा ने सिर टेढ़ा करके उस अजीब चित्र को देखते हुए बुदबुदाई।

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