सान्वी और चरमराती सीढ़ियों का राज़
आयु 6–8
हर रात कोई चुपके से नीचे आकर बिल्ली का कटोरा खाली कर जाता है, तो सान्वी घर की हर चरमराती सीढ़ी का नक्शा बनाती है, उस एक चुप सीढ़ी पर घंटी बाँध देती है जिससे सबको गुज़रना पड़ता है, और आधी रात के मेहमानों के एक हैरान कर देने वाले परिवार का पता लगा लेती है।

हर सुबह का खाने का कटोरा खाली मिलता, चाट-पोंछकर साफ़। “रात को कोई चुपके से आता है,” सान्वी ने अपना आतिशी शीशा थपथपाते हुए कहा। “और मैं पता लगाकर रहूँगी कि वह कौन है।” उसके पीछे दीवार में बना बिल्ली का छोटा-सा दरवाज़ा हमेशा की तरह चुपचाप था। यह उसका अब तक का सबसे बड़ा मामला था।
सबसे पहले सान्वी को एक नक्शा चाहिए था। उसने बैठक के फ़र्श पर ग्राफ़ वाला काग़ज़ फैलाया और हर कमरा, हर दरवाज़ा और हर एक सीढ़ी बनाने लगी। “अगर मैं घर को अच्छे से जान लूँगी,” उसने कहा, “तो मुझे पता चल जाएगा कि चोर कहाँ से चलता है। जाँच की डायरी: पहले घर का नक्शा।”
एक-एक सीढ़ी करके सान्वी पूरी सीढ़ियाँ चढ़ी-उतरी और हर तख़्ते को अपने जूते से ज़ोर से दबाया। चर्रर्र! कर्रर्र! चीं-ईं-ईं! हर शोर मचाते तख़्ते पर उसने नक्शे में निशान लगा दिया। जाँच की डायरी: लगभग हर सीढ़ी पुराने ज़ंग लगे फाटक की तरह चीं-चीं करती है।


