अनन्या और मधुमक्खियों का सीधी-उड़ान वाला नक्शा
आयु 6–8
जब अनन्या की विज्ञान की क्लास को जंगली मधुमक्खियों का छत्ता ढूँढना होता है, तो वह एक भले मधुमक्खी पालक मोहन चाचा के साथ मिलकर मधुमक्खियों की उड़ान की लकीरें देखती और नक्शे पर उतारती है। तीन सीधी लकीरें एक रोमांचक तिकोना बन जाती हैं, जो उसे छत्ते के घर तक पहुँचा देता है।

“मधुमक्खियों को एक जंगली घर चाहिए, और हमारी विज्ञान की क्लास को वह घर ढूँढना है,” अनन्या ने कहा। मधुमक्खी पालक मोहन चाचा ने चीनी के शरबत की एक छोटी-सी लकड़ी की कटोरी रख दी। “ध्यान से देखना,” चाचा बोले। “पकड़ना नहीं, छूना नहीं। बस देखना है। रास्ता मधुमक्खियाँ खुद दिखाएँगी।”
भन-भन! एक मोटी धारीदार मधुमक्खी कटोरी पर आकर बैठी और शरबत पीने लगी। “ये हुई एक!” अनन्या ने फुसफुसाकर कहा। वह आगे झुकी तो उसका पीतल का कंपास झूल गया। टेढ़ू एक गुलबहार के डंठल पर चढ़ता हुआ आया। “अरे वाह, मधुमक्खी! क्या ये मेरी दोस्त है?” “श्श्श,” अनन्या ने कहा। “देखना है, बोलना नहीं।”
मधुमक्खी उड़ी और तीर की तरह सीधी बाड़ के पार बलूत के पेड़ों की तरफ़ चली गई। अनन्या झट से मुड़ी, उसकी आँखें फैल गईं। “वो उधर उड़ी!” उसने उँगली से इशारा करके कहा। मोहन चाचा ने सिर हिलाया। “इसे कहते हैं सीधी उड़ान, यानी बीलाइन। इसे नक्शे पर लगा लो।” अनन्या ने कागज़ पर ध्यान से एक सीधी लकीर खींच दी।


