आध्या और सात घड़ियों का रहस्य
आयु 6–8
जब आध्या की परदादी की बैठक में एक बंद दराज़ की रखवाली सात चुप घड़ियाँ कर रही हैं, तो उसे लंदन, टोक्यो, न्यूयॉर्क और काहिरा का सही समय निकालना होगा, ताकि हर सुई ठीक जगह लगे और छिपी कुंडी खुल जाए।

“इस कमरे की सारी घड़ियाँ उसी दिन रुक गई थीं, जिस दिन परदादी ने अपना राज़ छिपाया था,” रामलाल दादाजी ने कहा। उनके हाथ धूल भरी घड़ी के डिब्बे पर टिके थे। आध्या ने अपना कान काँच से सटा लिया, पर उसे बस सन्नाटा सुनाई दिया। सात चुप घड़ियाँ। सात शहर। और उनके नीचे एक बंद दराज़, जो इंतज़ार कर रही थी। “इन्हें सही समय पर लगा दो,” दादाजी ने धीरे से कहा, “दराज़ अपने आप खुल जाएगी।”
पिप ने तीन बार झटपट, चमकीली टिक-टिक की और नोटबुक पर कूद गया। उसका मतलब था, “पहले लंदन!” आध्या ने सरसों-पीली वास्कट और जंगल-हरी पतलून पहन रखी थी। उसने चमड़े की जिल्द वाली नोटबुक खोली। लंदन में ग्रीनविच मीन टाइम चलता है, यानी धरती की सारी घड़ियों की शुरुआती रेखा। “अभी लंदन में दोपहर के तीन बजे हैं,” आध्या ने चमकती घड़ी को छूते हुए धीरे से कहा। “मतलब GMT में दोपहर के तीन बजे हैं। यह तो आसान है, अभी क
“टोक्यो थोड़ा मुश्किल है,” आध्या ने उँगली से दुनिया के नक्शे पर लकीर खींचते हुए कहा। पुराने काग़ज़ से हल्की-सी धूल और स्याही की गंध आ रही थी। “टोक्यो GMT से नौ घंटे आगे है। दोपहर के तीन बजे में नौ घंटे जोड़ो, तो आधी रात हो गई!” आध्या ने हाथ बढ़ाकर पीतल की छोटी सुइयों को धीरे से घुमाया, जब तक वे सबसे ऊपर नहीं मिल गईं। टोक्यो की घड़ी ने हल्की-सी खट की, जैसे हामी भर रही हो। ठंडा पीतल उसकी उँगलियों के


