पीहू और काँच-घर का गुप्त दरवाज़ा

आयु 6–8

जब पीहू को बिलकुल सही मोज़ेकों के बीच एक टेढ़ी टाइल दिखती है, तो सममिति की खोज उसे एक भूले हुए तहख़ाने तक ले जाती है, जो राज़ों से भरा है।

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पुराने काँच-घर में गर्म मिट्टी और संतरे के फूलों की महक थी। सैकड़ों काँच की खिड़कियों से धूप आ रही थी और फ़र्श पर, जो पूरा छह कोनों वाली टाइलों से बना था, सुनहरी रोशनी बिखर रही थी। "यह जगह तो जैसे कोई पहेली वाला डिब्बा है," पीहू फ़व्वारे के पास घुटनों के बल बैठकर फुसफुसाई। "ज़रा ध्यान से देखो," उसने खुद से धीरे से कहा। इस डिज़ाइन में कुछ तो गड़बड़ लग रही थी...

"कैसी गड़बड़?" ने फ़र्न के गमले के ऊपर से कूदते हुए पूछा। पीहू ने टाइलों के किनारों पर उँगली घुमाई, पर उन्हें छुआ नहीं। "देखो, हर छह कोनों वाली टाइल की कमरे के दूसरी तरफ़ एक जोड़ीदार है, वही रंग, वही छोटा-सा डिज़ाइन। इसे सममिति कहते हैं। आईने जैसा जोड़ा, बार-बार।" ने आँखें सिकोड़ीं। "मतलब... हर चीज़ हर चीज़ से मिलती है?" "यही तो बात है," पीहू बोली। "चलो, साबित करके देखते हैं।"

वे फ़व्वारे से शुरू करके बाहर की ओर बढ़ते गए। नीली गोल-गोल सर्पिल वाली टाइल की जोड़ीदार नींबू के पेड़ के पास मिली। लाल तारे वाली टाइल की जोड़ी दरवाज़े के पास मिल गई। ने उँगलियों पर गिना। "दस जोड़े! यह फ़र्श तो बिलकुल संतुलित है," उसने ऐलान किया। पीहू मुस्कुराई। "हर डिज़ाइन का कोई न कोई किनारा होता है, । बस हमें अभी वह मिला नहीं है।"

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