मायरा की तारों वाली गुप्त पहेली
आयु 6–8
जब एक रहस्यमयी छेदों वाला कार्ड आता है, तो पहेलियों की शौकीन मायरा पता लगाती है कि उसमें आसमान का एक गुप्त नक़्शा छिपा है, जो सिर्फ़ लैम्प की रोशनी में पढ़ा जा सकता है, और वह नक़्शा क़दम-दर-क़दम उसे पार्क के बरगद की जड़ों के बीच छिपे ख़ज़ाने के डिब्बे तक ले जाता है।

मायरा को अच्छी पहेली सुलझाना लगभग हर चीज़ से ज़्यादा पसंद था। इसलिए जब उसे दरवाज़े की चटाई पर एक लिफ़ाफ़ा मिला, जिस पर न कोई नाम था, न टिकट, बस एक काला कार्ड था जिसमें छोटे-छोटे छेद थे, तो उसका दिल धक-धक करने लगा। “मिलो,” उसने फुसफुसाकर कहा, “यह तो सचमुच का रहस्य है।” मिलो ने धीरे से पलकें झपकाईं। मायरा ने मान लिया कि इसका मतलब “हाँ” है।
ऊपर अपने अटारी वाले कमरे में मायरा कार्ड को बार-बार पलट कर देखती रही। वह कुछ ख़ास नहीं लग रहा था, बस एक सादा काला टुकड़ा जिसमें छोटे-छोटे छेद थे। पर उसने कभी पढ़ा था कि कुछ भी तब तक “कुछ नहीं” होता है, जब तक उस पर रोशनी न डाली जाए। “कोशिश करने में क्या हर्ज़ है,” उसने कहा। मिलो ने जम्हाई लेते हुए जैसे एक शब्द कहा, “ज़ाहिर है।”
मायरा ने पीतल वाला लैम्प जलाया और कार्ड को बल्ब और दीवार के बीच पकड़ लिया। दीवार के वॉलपेपर पर नन्हे-नन्हे तारे खिल उठे, बिखरे हुए और जगमगाते, जैसे पूरा रात का आसमान कमरे में कूद आया हो! “मिलो, देखो!” वह हाँफ़ती हुई बोली, उसकी आवाज़ बस एक साँस जितनी धीमी थी। “यह सिर्फ़ छेद नहीं हैं, यह तो पूरा आसमान है!”


