आध्या और सारस का छिपा हुआ संदेश
आयु 6–8
जब काग़ज़ का एक रहस्यमयी सारस आध्या की खिड़की पर टक-टक करता है, तो उसे स्याही के फीके पड़ने से पहले हर मोड़ याद करना होगा, बिना एक भी फटन के उसे खोलना होगा, उसका राज़ पढ़ना होगा, और फिर उसे बिल्कुल पहले जैसा मोड़ देना होगा।

टक। टक। टक। खिड़की की चौखट पर कोई चीज़ हल्की-सी आवाज़ के साथ आकर गिरी। “सारस! सारस!” पिप्पी चिल्लाया और मेज़ पर उछलने लगा। आध्या ने अपनी कॉपी से सिर उठाया — सामने काग़ज़ का एक सारस था, इतनी सफ़ाई से मोड़ा हुआ कि लगता था अभी फिर उड़ जाएगा।
आध्या ने सारस को उजाले में उठाया और धीरे-धीरे घुमाकर देखा। “पिप्पी, इसका हर मोड़ एकदम तीखा है। किसी ने इसे जान-बूझकर बनाया है।” पिप्पी ने उसे सूँघा, उसकी मूँछें फड़क रही थीं। “अरे वाह, कोई गुप्त संदेश! खोलो, खोलो!” “अभी नहीं,” आध्या ने कहा। “पहले मैं इसे अच्छे से देखूँगी।”
“सँभलकर, सँभलकर, सँभलकर,” आध्या बुदबुदाई और उसने अपनी कॉपी खोली। “किसी भी तह को छूने से पहले मुझे हर मोड़ याद करना होगा।” पिप्पी ने दोनों पंजे अपने गालों पर रख लिए। “मुझसे तो इतनी देर कभी रुका ही नहीं जाता,” वह चीं-चीं करता हुआ छोटे-से गोल चक्कर में उछलने लगा।


