ईशान और डर को हराने वाली सिम्फनी

आयु 6–8

पूरे स्कूल के सामने सोलो गाने के लिए चुने गए ईशान को अपनी तेज़ धड़कन और काँपते घुटनों को ऐसी आवाज़ में बदलना है जो पूरे हॉल में गूँज उठे।

"ईशान और डर को हराने वाली सिम्फनी" का कवर

“ईशान, सोलो गाने के लिए तुम्हारा नाम चुना गया है!” मीना मैडम ने संगीत-कक्ष के दरवाज़े पर लगी सूची पर उँगली थपथपाते हुए कहा। ईशान का दिल कलाबाज़ियाँ खाने लगा। सोलो! यानी उस बड़े से मंच पर बस वह अकेला। कितना शानदार! और कितना डरावना! दोनों एक साथ।

उस रात ईशान बिस्तर पर उठकर बैठ गया। चाँदनी परदों पर चाँदी बिखेर रही थी। “अगर मेरी आवाज़ काँप गई तो? अगर मैं बोल भूल गया तो?” वह ख़ामोश कमरे में फुसफुसाया। उसने एक हाथ में पिच-पाइप की डोरी कसकर पकड़ रखी थी।

अगले दिन मंच के पीछे ईशान का गला बिलकुल सूख रहा था। गलियारे में म्यूज़िक स्टैंड ही स्टैंड भरे थे। ने गाल फुलाए और अपने घुटनों पर डगमगाती-सी ड्रम-रोल बजाने लगा। “देखा?” बोला। “मुझे भी कँपकँपी होती है, बस मैं अपनी कँपकँपी को संगीत बना लेता हूँ।” ईशान लगभग, लगभग मुस्कुरा ही पड़ा।

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