वीर और नए बच्चे का साथी
आयु 6–8
जब एक नया बच्चा कैंटीन में अकेला बैठा होता है, तो एक बच्चा हिम्मत करके अपने लोकप्रिय दोस्तों को छोड़कर उसके पास जाता है, और जान लेता है कि दयालुता को साझा शब्दों की ज़रूरत नहीं होती।

वीर को लंचटाइम बहुत पसंद था। उसे ट्रे की खनखनाहट अच्छी लगती थी, गरम रोटी की ख़ुशबू अच्छी लगती थी, और खिड़की के पास अपने सबसे अच्छे दोस्तों, प्रिया और बाकी टोली, के साथ बैठना अच्छा लगता था। पर आज उसकी नज़र एक ऐसे बच्चे पर पड़ी जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा था। वह अकेला बैठा था।
नया बच्चा अपनी ट्रे को घूरता रहा। वह किसी मज़ाक पर नहीं हँसा। उसने एक शब्द भी नहीं बोला। वीर ने प्रिया के कान में पूछा, “तुम्हें इसका नाम पता है?” प्रिया ने कंधे उचका दिए। “ये अभी-अभी यहाँ आया है। इसे हमारी भाषा नहीं आती।”
वीर पूरे लंच में उस नए बच्चे को देखता रहा। किसी ने हाथ नहीं हिलाया। किसी ने उसकी ओर देखकर मुस्कुराया तक नहीं। उस बड़ी-सी मेज़ पर वह बहुत छोटा और अकेला लग रहा था। अगर वीर उसके पास गया और सब हँस पड़े तो? टिन का लंचबॉक्स उसके हाथों में भारी लगने लगा। टक-टक। जब भी वह कुछ गहराई से सोचता, लंचबॉक्स पर ऐसे ही थपकी देता था।


