अर्जुन और स्केटपार्क का बटुआ

आयु 6–8

जब अर्जुन को स्केटपार्क में नोटों की मोटी गड्डी वाला बटुआ मिलता है, तो उसे जल्दी अमीर बनने और सही काम करने में से एक को चुनना पड़ता है।

"अर्जुन और स्केटपार्क का बटुआ" का कवर

स्केटपार्क में पहियों की खड़-खड़ और हँसी की आवाज़ गूँज रही थी। कंक्रीट पर पहिये दौड़ रहे थे। अर्जुन अपनी चमकीली नारंगी हुडी और गहरे नीले शॉर्ट्स पहने, अपने हरे सितारे वाले स्केटबोर्ड पर बड़े ढलान से फर्राटे से नीचे आया। “देखो, मेरी नई ट्रिक!” उसने मिलन और नीरा को आवाज़ लगाई। हवा उसके कानों के पास से सन-सन करती निकल रही थी और वह खूब मुस्कुरा रहा था।

शर्मा जी की फूलों की झाड़ियों के पास रुककर अर्जुन ने देखा कि मिट्टी से कुछ भूरा-सा झाँक रहा है। वह झुका और उसे खींचकर बाहर निकाल लिया। वह चमड़े का मोटा-सा बटुआ था, जिसके किनारे से नोटों की मोटी गड्डी दिख रही थी। “अरे वाह!” वह धीरे से बोला। उसकी आँखें फैल गईं।

मिलन सबसे पहले फिसलता हुआ वहाँ पहुँचा, उसकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गईं। “इतने सारे पैसे!” वह हैरानी से बोला। नीरा पास झुककर बोली, “इनसे तो दुनिया के सारे वीडियो गेम आ जाएँगे!” और वह मुस्कुराने लगी। अर्जुन बस बटुए को देखता रहा। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और उसकी उँगलियाँ चमड़े पर कस गई थीं।

"अर्जुन और स्केटपार्क का बटुआ" का पृष्ठ 1"अर्जुन और स्केटपार्क का बटुआ" का पृष्ठ 2"अर्जुन और स्केटपार्क का बटुआ" का पृष्ठ 3

अपने बच्चे के नाम और फ़ोटो से बनाएँ · कहानी पुस्तकालय देखें