रोहन और शांत, मज़बूत आवाज़
आयु 6–8
जब मैदान में एक दादागिरी करने वाला बच्चा लड़ाई शुरू करने के लिए रोहन को धक्का देता है, तो रोहन को मुट्ठियों से भी बड़ी ताक़त मिलती है: एक शांत साँस, एक स्थिर आवाज़ और किसी बड़े को बताने की हिम्मत।

छुट्टी की घंटी बजी! रोहन दौड़ता हुआ खेल के मैदान में पहुँचा। उसके सीने पर चाँदी का लॉकेट उछल रहा था। उसने लाल रंग की ज़िप वाली जैकेट और पीली-सफ़ेद धारियों वाली कमीज़ पहन रखी थी। रेत का गड्ढा चमक रहा था, झूले चरमरा रहे थे और धारियों वाली गेंद चढ़ने वाले गुंबद के पास रखी थी। “गुंबद तक रेस लगाते हैं!” प्रिया ने पुकारा। उसकी दोनों चोटियाँ बैंगनी फ्रॉक के पीछे लहरा रही थीं।
रोहन ने सबसे पहले धारियों वाली गेंद उठा ली और मुस्कुराया। “मिल गई!” हरी धारियों वाली कमीज़ पहने पैर पटकता हुआ आया। उसने हाथ बाँध रखे थे और गाल लाल थे। “वो मेरी गेंद है। इधर दो,” उसने चिढ़कर कहा और अपने सादे भूरे जूते दीवार की तरह रोहन के सामने जमा दिए।
धड़ाम! ने रोहन को सीने पर ज़ोर से धक्का दे दिया। वह लड़खड़ाकर एक कदम पीछे हटा और उसकी साँस अटक गई। “आउच!” प्रिया की चोटियाँ झूलते-झूलते थम गईं और उसके मुँह से हल्की चीख निकल गई। पूरा मैदान जैसे साँस रोके देख रहा था कि अब रोहन क्या करेगा।


