वीर और मेपल कोर्ट का वादा
आयु 6–8
जब खेल के मैदान में कुछ बच्चे एक सहपाठी के बोलने के ढंग का मज़ाक उड़ाते हैं, तो वीर कंधे से कंधा मिलाकर उसके साथ खड़ा हो जाता है, उसके बात पूरी करने तक धीरज से इंतज़ार करता है, और चिढ़ाने के उस पल को वफ़ादारी के सबक़ में बदल देता है।

रोज़ स्कूल के बाद वीर और दौड़ते हुए मेपल कोर्ट पहुँच जाते। वीर की दादी हमेशा कहती थीं, “अच्छे दोस्त इंतज़ार करते हैं,” और वीर को इस बात पर पक्का यक़ीन था। उसे रस्सी वाला झूला पसंद था, बास्केटबॉल की धप-धप पसंद थी, और सबसे ज़्यादा पसंद थीं की डायनासोर वाली कहानियाँ — भले ही उसके शब्द बाहर आने में थोड़ा वक़्त लगाते थे।
“बताओ, मुझे क्या मिला,” ने हाँफते हुए कहा। “एक फ़-फ़-फ़ॉसिल। मतलब, मुझे लगता है कि ये फ़ॉसिल है। इसका आकार बड़ा अ-अजीब है...” वह हर उभार और हर धारी के बारे में बताता गया, और वीर चाँदी की सीटी को उँगलियों के बीच घुमाते हुए दोनों कान खोलकर सुनता रहा।
मैदान के उस पार से स्कूल के दो बच्चे, देव और तरुण, पुरानी बास्केटबॉल लिए टहलते हुए आए। तरुण थोड़ा झिझका और इधर-उधर देखने लगा, पर देव खुलकर मुस्कुराया। “ठीक से बोलो न,” उसने इतनी ज़ोर से कहा कि पूरे मैदान में सुनाई दिया। का मुँह बंद हो गया।


