विवान और तूफ़ान की शांत आँख
आयु 6–8
जब एक भयंकर तूफ़ान घर को अँधेरे में डुबो देता है, तो 7 साल का विवान अपना भरोसेमंद टॉर्च-लैंप उठाता है। मम्मी-पापा के नीचे काम करते समय वह दो डरे हुए पालतू जानवरों के लिए तूफ़ान के बीच की शांत, चमकती आँख बन जाता है।

बिजली कड़की और ऐसी गड़गड़ाहट हुई जैसे किसी दैत्य ने ताली बजाई हो, और घर की सारी बत्तियाँ एक साथ गुल हो गईं। बारिश खिड़कियों पर ढोल की तरह धड़ाधड़ बरसने लगी। “अरे बाप रे,” विवान ने धीरे से कहा। उसका दिल धक-धक कर रहा था और आँखें फटी की फटी रह गई थीं। अँधेरे में कहीं से बिस्किट के चिंता भरे कूँ-कूँ करने की आवाज़ आई।
तहखाने की सीढ़ियों से विवान के मम्मी-पापा की आवाज़ें ऊपर आईं। वे शांत थे, पर काम में लगे थे। “हम यहाँ नीचे सारी चीज़ें ठीक से बाँध-सँभाल रहे हैं। क्या तुम ऊपर सबको आराम से रखने में हमारी मदद करोगे?” “जी, अभी!” विवान ने ज़ोर से जवाब दिया। उसे काम मिल गया था, इसलिए वह पहले से ज़्यादा हिम्मती महसूस करने लगा।
सबसे पहले रोशनी चाहिए! विवान दौड़कर रसोई की दराज़ तक गया और अपना सबसे प्यारा टॉर्च-लैंप निकाल लाया। खट! सुनहरी गर्म रोशनी फूट पड़ी और अँधेरे को भगा दिया। “नमस्ते, किरण,” विवान मुस्कुराया।


