पीहू और रिसेस की बेंच की रखवाली
आयु 6–8
जब एक ऐसे दोस्त के बारे में फुसफुसाहटें फैलने लगती हैं जो अपनी सफ़ाई देने के लिए वहाँ मौजूद ही नहीं है, तब पीहू को तय करना होता है कि वह बेंच पर चुप बैठी रहे या खड़ी होकर वह एक वाक्य कहे जो सब कुछ बदल सकता है।

रिसेस पीहू का सबसे पसंदीदा समय था। बड़े पेड़ के नीचे वाली लकड़ी की बेंच उसका कंट्रोल रूम थी। वहाँ से वह पूरे खेल के मैदान को खेलों और हँसी से गूँजते देख सकती थी। आज कुछ अलग लग रहा था। क्लाइंबिंग डोम के पास बच्चों का एक झुंड खड़ा फुसफुसा रहा था और बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था।
पकड़म-पकड़ाई खेलकर हाँफती हुई धम्म से पीहू के पास बैठ गई। “तुमने मिलन के बारे में सुना?” उसने फुसफुसाकर कहा। “वह बीमार है, इसलिए आज स्कूल नहीं आया। कुछ बच्चे कह रहे हैं कि वह बहाना बना रहा है, क्योंकि उसे बड़े कीकबॉल मैच से डर लग रहा है।” पीहू के पेट में अजीब-सी गुदगुदी हुई।
वह जानती थी कि यह सच नहीं है। मिलन ने कल ही उसे बताया था कि उसका एक दाँत हिल रहा है और बुखार भी आ रहा है। पर डोम के पास की फुसफुसाहट और तेज़ होती गई। हाथ मुँह पर रखकर बातें हो रही थीं। नज़रें कीकबॉल की लाइन में मिलन की खाली जगह की ओर घूम रही थीं।


