मायरा और गहरे पानी में छलांग
आयु 6–8
मायरा को पूल के गहरे पानी से डर लगता है, लेकिन कोच मारिया मैडम की पक्की मदद, तीन धीमी साँसों और अपनी बढ़ती हिम्मत के सहारे वह आख़िरकार छलांग लगा देती है, तली में एक नन्हा पीला दोस्त ढूँढ लेती है और एक नई-नवेली गोताखोर बनकर पानी की सतह पर लौटती है।

मोहल्ले का स्विमिंग पूल नीले शीशे की बड़ी-सी चादर जैसा चमक रहा था। छपाक! सरर्र! मायरा उथले हिस्से के किनारे खड़ी थी। गरम टाइलों पर उसके पैरों की उँगलियाँ मुड़ी हुई थीं, और वह लंबी लेन के उस पार गहरे पानी की तरफ़ देख रही थी। “वहाँ का पानी तो बहुत गहरा है,” उसने धीरे से कहा, और हिम्मत जुटाने के लिए अपनी छोटी-सी नारंगी फ़्लोट बेल्ट को थपथपाया।
"नमस्ते, बहादुर तैराक!" कोच मीना मैडम ने पुकारा। उनकी चाँदी जैसी सीटी हवा में झूल रही थी और वे लंबे क़दमों से पास आ रही थीं। "आज हम गहरे पानी में चलेंगे।" मायरा का पेट पराँठे की तरह पलट गया। "वो तो... बहुत गहरा है," उसने कहा। कोच मीना मैडम मुस्कुराईं। "गहरा होने का मतलब डरावना होना नहीं है। चलो, साथ चलकर देखते हैं।"
वे टाइल वाले किनारे पर चलती गईं, जहाँ नीचे का पानी हल्के नीले से गहरे, गाढ़े नीले रंग का हो गया। टप, टप, छोटी-छोटी लहरें बन रही थीं। मायरा ने झुककर नीचे झाँका। उसका दिल ढोल की तरह धक-धक कर रहा था। बहुत नीचे कोई छोटी-सी पीली चीज़ हिल-डुल रही थी, जैसे आँख मार रही हो। “वो क्या है?” मायरा ने उस नन्हे-से आकार की तरफ़ उँगली करके पूछा।


