सान्वी की दया वाली ब्लैक बेल्ट

आयु 6–8

जिस दिन सान्वी जूनियर ब्लैक बेल्ट की परीक्षा देती है, उस दिन वह सीखती है कि पूरे डोजो में सबसे ताक़तवर चाल यही है कि अपने से छोटे की मदद के लिए झुक जाया जाए।

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आज वह दिन आ गया था। सान्वी शहद जैसे रंग के लकड़ी के फ़र्श पर खड़ी थी। उसकी कड़क सफ़ेद डोबोक के नीचे दिल ढोल की तरह धड़क रहा था। तोड़ने के लिए तख़्ते रखे थे। दिखाने के लिए फ़ॉर्म तैयार थे। और मास्टर चोई उसकी हर साँस पर नज़र रखे हुए थे। “तैयार हो?” उन्होंने पूछा। सान्वी ने सिर हिलाया और नीला, सितारों की सिलाई वाला पैड पास के ताक पर रख दिया।

सबसे पहले फ़ॉर्म हुए। सान्वी पानी की तरह बहती हुई चली, जैसे पानी अपना आकार ढूँढ लेता है। मुक्का, घूमना, रोकना, साँस लेना। मज़बूत। स्थिर। दयालु। मास्टर चोई की आँखें चुपचाप उसके पीछे-पीछे चलती रहीं और उसकी हर सधी हुई हरकत को परखती रहीं।

फिर तख़्तों की बारी आई। तीन मोटे तख़्ते तैयार थे, जिन्हें एक साथी ने अपने हाथों से मज़बूती से पकड़ रखा था। सान्वी ने गहरी साँस ली। उसे अभ्यास के वे सारे वार याद आ गए जो उसे इस पल तक लाए थे। “जब तैयार हो, तब शुरू करो,” मास्टर चोई ने कहा। पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया।

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