आध्या का अपना प्यारा कमरा
आयु 6–8
नए कमरे में पहली रात, बिना नाइटलाइट के, आध्या को अनजाने अँधेरे का सामना करने की हिम्मत जुटानी है। उसके पास एक टॉर्च है, एक जिज्ञासु बिल्ली है और समुंदर किनारे की धूप भरी यादें हैं।

आज रात आध्या के अपने कमरे में पहली रात थी। उसने नीले रंग का नरम पजामा पहना था, जिस पर छोटी-छोटी सफ़ेद सीपियाँ बनी थीं। अब किसी के साथ कमरा बाँटना नहीं था, कोने में जलता नाइटलाइट भी नहीं था। बस वह थी, एक नया बिस्तर था, और कुछ डिब्बे थे जो अभी खुलने बाकी थे। "अब तुम बड़ी हो गई हो," घरवालों ने कहा। आध्या मुस्कुराई, पर खिड़की के बाहर का अँधेरा भी बहुत बड़ा लग रहा था।
पेपर बिल्ली उछलकर रज़ाई पर आ बैठी और ज़ोर-ज़ोर से घुरघुराने लगी। "चलो, मैं बिल्कुल अकेली तो नहीं हूँ," आध्या ने धीरे से कहा और पेपर के कानों के पीछे सहलाया। बाहर ऊँचे पेड़ की डालियाँ खिड़की के शीशे से हल्के-हल्के टकरा रही थीं, जैसे कोई उँगलियों से खटखटाकर अंदर आना चाहता हो।
लैंप खट से बुझ गया। अँधेरे ने पूरे कमरे को निगल लिया। आध्या ने कंबल ठोड़ी तक खींच लिया। "समुंदर के किनारे के बारे में सोचो," उसने खुद से धीरे से कहा। पर वह ख़याल जल्दी ही फिसल गया। रात में घर आराम से बैठ रहा था, और उसकी हर नई चरमराहट उस ख़याल को दूर भगा देती थी।


