ईशान और मैज़-रनर बोट बोल्ट

आयु 6–8

जब प्रतियोगिता का मैज़ अचानक बदल जाता है, तो ईशान को घड़ी से तेज़ सोचना पड़ता है। उसे अपने रोबोट का लॉजिक लूप उसी वक़्त दोबारा लिखना है, एक-एक सेंसर के साथ, ताकि रोबोट सुरक्षित मंज़िल तक पहुँच सके।

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जिम में बड़ी हलचल थी। हर तरफ़ सीटियाँ बज रही थीं और पहिए चीं-चीं कर रहे थे। मैज़ के चबूतरे के पास सारी टीमें कतार में खड़ी थीं और उनके रोबोट गुनगुना रहे थे और टिमटिमा रहे थे। ईशान अपने मैज़-रनर बोट बोल्ट के पास घुटनों के बल बैठ गया। बोल्ट की नीली सेंसर आँख धीरे से जाग उठी। “तैयार है, दोस्त? बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना है!” ईशान ने फुसफुसाकर कहा। बोल्ट ने दो बार बीप किया। यही उनका “हाँ” था। हमेशा

“याद रखना,” मीरा ने अपनी टीम के बोट के साथ ईशान के पास बैठते हुए कहा, “अगर मैज़ बदल जाए, तो तुम्हारा कोड तेज़ी से सोचने वाला होना चाहिए।” ईशान मुस्कुराया और लैपटॉप थपथपाकर बोला, “इसीलिए तो मैंने इफ़/दैन लूप बनाया है। अगर आगे दीवार है, तो मुड़ जाओ। बस, इतना आसान!” मीरा ने ठुड्डी पर उँगली रखकर कहा, “मैज़ तो बस पैटर्न होते हैं, जो हल होने का इंतज़ार करते हैं।”

जजों की मेज़ से एक हाथ ऊपर उठा। “सब रोबोट अपनी शुरुआती जगह पर आ जाओ!” एक आवाज़ गूँजी। ईशान ने बोल्ट को मैज़ के दरवाज़े पर रखा। फिर किस्मत के लिए अपनी हुडी में लगे छोटे-से पेचकस को थपथपाया। “अल्ट्रासोनिक सेंसर तैयार हैं?” उसने पूछा। बोल्ट की एंटीना जैसी मूँछें हिलीं और उसकी नीली आँख स्थिर होकर चमकने लगी। तैयार! बस, अब थोड़ी देर और।

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