अर्जुन की पानी वाली क्रेन
आयु 6–8
जब अर्जुन पापा के बनाए जा रहे ट्रीहाउस तक औज़ारों की भारी बाल्टी नहीं उठा पाता, तो वह पानी से चलने वाली एक क्रेन बना लेता है, जो अँगूठे के एक हल्के-से दबाव से सब कुछ ऊपर पहुँचा देती है।

अर्जुन को चीज़ें बनाना बहुत पसंद था। लेकिन पुराने बलूत के पेड़ पर बन रहे ट्रीहाउस के चबूतरे के लिए भारी औज़ार चाहिए थे, और उसकी बाँहों में इतना ज़ोर नहीं था। “उफ़, यह बाल्टी तो मुझसे भी भारी है!” वह कराह उठा। लकड़ी के ढेर पर बैठी कोको ने सिर टेढ़ा करके देखा। “मैंने कहा था न, इसे लेकर चढ़ना अच्छा आइडिया नहीं है,” वह चीख़ी।
“कोई आसान तरीका ज़रूर होगा,” अर्जुन ने कहा और तिरपाल पर धम से बैठ गया। उसकी नज़र धूप में चमकते लिपटे हुए बाग़ वाले पाइप पर पड़ी। “अगर पानी ही मेरे लिए उठाने का काम कर दे तो?” कोको ने अपने पंख फुलाए। “पानी? उससे तो बस पोखर बनेगा,” उसने कहा। पर अर्जुन की आँखों में तो एक आइडिया चमकने लगा था।
अर्जुन ने दो सिरिंजों में पानी भरा और उन्हें पारदर्शी प्लास्टिक की नली से जोड़ दिया। “देख कोको,” उसने कहा और एक सिरिंज को हल्के से दबाया। कुछ नहीं हुआ। नली बस हिलती रही और पानी की एक नन्ही बूँद टपक गई। “हा! मैंने कहा था न,” कोको चीख़ी। अर्जुन ने पानी पोंछा और मुस्कुराया। “इसका मतलब बस इतना है कि मुझे इसे और कसकर बंद करना होगा।”


