विवान और पहाड़ वाली झोपड़ी की नई जान
आयु 6–8
जब पहाड़ के तूफ़ान से दादी Wren की झोपड़ी का रेडियो बंद हो जाता है, तो विवान एक ऐसी मशीन बनाने निकल पड़ता है जो बिजली को वापस ला सके। और जब हवा उसका साथ छोड़ देती है, तो उसे बगीचे में बहती हुई एक और भी चतुर तरकीब मिल जाती है।

झोपड़ी की छत पर बारिश ज़ोर-ज़ोर से बरस रही थी और पहाड़ के ऊपर बादल गरज रहे थे। अंदर का रेडियो खरखराया, घरघराया और फिर चुप हो गया। “तूफ़ान ने हमारी बिजली गुल कर दी,” उन्होंने आह भरकर कहा, “पर मुझे पता है कि शेड में कुछ अतिरिक्त पुर्ज़े रखे हैं।” विवान ने बाहर तेज़ हवा को झाँककर देखा और मुस्कुरा दिया। “तो चलिए, अपनी बिजली हम खुद बनाते हैं!”
सुबह तक तूफ़ान थम चुका था। पीछे रह गए थे पानी के गड्ढे और हल्का सलेटी आसमान। विवान ने रबर के बूट पहने और औज़ारों की पेटी खनकाता हुआ शेड की ओर दौड़ पड़ा। “पहले मुझे पुर्ज़े चाहिए,” उसने कहा। तभी उसकी नज़र दीवार से टिकी पुरानी साइकिल पर पड़ी, जिसका एक पहिया हवा में धीरे-धीरे घूम रहा था। हवा हो या पानी, विवान कोई न कोई रास्ता ज़रूर निकाल लेगा।
“हवा में घूमने वाला पहिया... यह तो छोटी मोटर घुमा सकता है!” विवान ने कहा और साइकिल को धकेलकर बरामदे में ले आया। तभी दरवाज़े से का हाथ दिखा, जिसमें एक छोटी काली डी.सी. मोटर थी। “यह मुझे अपने पुर्ज़ों वाली दराज़ में मिली,” उन्होंने आवाज़ लगाई। “तुम पंखे के ब्लेड बनाओ, तार जोड़ने में बाद में मैं मदद करूँगी।” “पक्का!”


