अर्जुन और सबसे कमाल की चेन-रिएक्शन मशीन
आयु 6–8
एक बच्चा, जो अपने आरामदेह बिस्तर से उठना ही नहीं चाहता, अपने कुत्ते को खाना खिलाने के लिए पूरे कमरे में फैली एक ज़बरदस्त चेन-रिएक्शन मशीन बनाता है, और जान जाता है कि एक छोटा-सा धक्का कैसे हलचल की पूरी दुनिया जगा देता है।

अर्जुन को अपना बिस्तर बहुत पसंद था। वह गरम था। वह नरम था। और वहाँ से उठने का अर्जुन का बिल्कुल इरादा नहीं था — नाश्ते के लिए भी नहीं। “बिस्कुट,” उसने फुसफुसाकर कहा, “आज नाश्ता खुद तुम्हारे पास आएगा।” बिस्कुट ने दो बार पूँछ हिलाई: मंज़ूर है! अर्जुन मुस्कुराया और अपने पजामे की जेब में रखा अपना लकी कंचा टटोलने लगा।
“ये रहा प्लान,” अर्जुन ने अपनी शेल्फ़ों वाली मीनार की ओर इशारा करके कहा। “ऊपर एक कंचा चुपचाप बैठा है, झपटने को तैयार। इसी को कहते हैं स्थितिज ऊर्जा!” उसने कंचे को लकड़ी की ट्रैक वाली मीनार की सबसे ऊपरी चोटी पर रखा और बस ज़रा-सा धक्का दिया।
कंचा ट्रैक पर सरपट दौड़ा — सरर्र! — तेज़ और तेज़। “ज़रा-सा धक्का, बड़ा-सा नतीजा — यही तो है चेन!” अर्जुन खुशी से चिल्लाया। कंचा ट्रैक के आख़िर से छिटका और पहले डोमिनो से जा टकराया। डोमिनो डगमगाया... और गिर पड़ा।


