आदित्य का चाँद वाला बिना मिट्टी का बगीचा
आयु 6–8
चाँद के काँच वाले गुंबद के बगीचे में आदित्य को स्ट्रॉबेरी की मुरझाती फ़सल बचानी है। इसके लिए उसे सही पोषक पानी और रोशनी के सही रंग मिलाने हैं, और वीडियो पर मंगल के आलू उगाने वाली दोस्त उसकी मदद करती है।

घर से दो लाख चालीस हज़ार मील दूर, आदित्य चाँद पर एक काँच के बगीचे में रहता था। स्ट्रॉबेरी की मीनारें लाल और नीली रोशनी में हल्की-हल्की गुनगुना रही थीं। "न मिट्टी, न धूप, फिर भी कोई दिक़्क़त नहीं," वह अक्सर कहता था, और अपनी चमकती पोषक-छड़ी को कमर की पेटी में लगा लेता था।
लेकिन आज कुछ गड़बड़ थी। स्ट्रॉबेरी के पत्ते थके हुए झंडों की तरह झुके हुए थे, किनारों पर फीके और कागज़ जैसे पतले। आदित्य का पेट घबराहट से उछल गया। "बोल्ट, ज़रा स्कैन करो," उसने सबसे पास वाली मीनार के पास घुटनों के बल बैठकर कहा। बोल्ट के एंटीना हिलने लगे। "पोषक तत्व बहुत कम हैं! बहुत ही कम!" वह चहका, और उसकी तीन लाल बत्तियाँ उदास होकर टिमटिमाने लगीं। "अगर मैं इसे समय पर ठीक न कर पाया तो?" आदित्य ने
आदित्य ने चमकती छड़ी को पानी की टंकी में डुबोया। छड़ी की नोक हल्की पीली होकर चमकी। "नाइट्रोजन कम है," उसने अपनी बगीचे वाली डायरी से ज़ोर से पढ़ा। "स्ट्रॉबेरी को सही मात्रा में पोषक तत्व चाहिए, बिल्कुल किसी रेसिपी की तरह।" वह होंठ चबाते हुए गहरी सोच में डूब गया, और छड़ी की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।


