वीर और पानी की बूँद की नन्ही-सी दुनिया

आयु 6–8

जब वीर तालाब के पानी की एक बूँद चमकती डिजिटल माइक्रोस्कोप की स्क्रीन पर टपकाता है, तो वह कल्पना करता है कि वह छोटा होकर एक हँसोड़ पैरामीशियम, एक शर्मीले अमीबा और टन्नू नाम के अकड़ू टार्डिग्रेड के बीच तैर रहा है, और एक अकेली बूँद में छिपे पूरे अनजान ब्रह्मांड का चार्ट बना रहा है।

"वीर और पानी की बूँद की नन्ही-सी दुनिया" का कवर

“बस एक नन्ही बूँद... और उसमें पूरी दुनिया!” वीर ने धीरे से कहा। उसने पेंसिल की नोक से तालाब के पानी की एक बूँद डिजिटल माइक्रोस्कोप की काँच की पट्टी पर टपकाई। स्क्रीन झिलमिलाई और फिर चमकीले हरे रंग से खिल उठी। वह पास झुका, गले का पीतल वाला लॉकेट झूल रहा था और आँखें हैरानी से फैली थीं। इतने ज़रा-से पानी में आख़िर क्या छिपा होगा?

स्क्रीन ज़ूम होती गई, पहले चालीस गुना बड़ी, फिर सौ गुना! नन्ही-नन्ही आकृतियाँ हिलती-डुलती दिखने लगीं। “पलक के बाल की नोक से भी छोटी,” वीर ने ज़ोर से पढ़ा और अपनी कॉपी में गिनतियाँ लिखने लगा। तभी वह रोशनी गुनगुने पानी की तरह उसके चारों ओर लिपट गई और रसोई कहीं गायब हो गई। बस एक नन्ही बूँद... और उसमें पूरी दुनिया!

रोशनी थमी तो वीर बूँद के अंदर ही तैर रहा था, एक कण जितना छोटा, और चमकती शैवाल की लड़ियों के पास से बहता जा रहा था। तभी एक गोल-मटोल जीव आठ नन्हे-नन्हे पैरों से धम-धम करता पास से निकला। “मेरा नाम है टन्नू!” उसने शान से कहा। “इस पूरी बूँद का सबसे मज़बूत जीव मैं ही हूँ, यह कभी मत भूलना!”

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