आरव का सूरज वाला रेडियो
आयु 6–8
जब सौर तूफ़ान हर फ़ोन और स्क्रीन बंद कर देता है, तो आरव को बिना किसी बिजली के एक रेडियो बनाना पड़ता है ताकि वह जान सके कि मदद आ रही है या नहीं।

बत्तियाँ झिलमिलाईं। टीवी पर बर्फ़ जैसी झिलमिल दिखने लगी। घर की हर स्क्रीन एक साथ काली पड़ गई। “सूरज ने तो पूरे शहर की बत्ती गुल कर दी!” आरव ने अपने अँधेरे फ़ोन को घूरते हुए कहा। “मुझे पता लगाना है कि क्या हो रहा है,” वह धीरे से बोला। “मुझे जानना है कि मदद आ रही है या नहीं।”
“यह कोरोनल मास इजेक्शन है,” सीढ़ियों से की आवाज़ आई, हमेशा की तरह शांत। “सूरज से निकला एक बड़ा धमाका। इससे सैटेलाइट और मोबाइल टावर बंद हो सकते हैं।” “लेकिन फिर हमें पता कैसे चलेगा कि क्या हो रहा है?” आरव ने पूछा। “मेरे साथ अटारी में चलो, नन्हे खोजी,” उन्होंने कहा। “मेरे पास एक पुरानी तरकीब है।”
अटारी में धूल और पुरानी लकड़ी की गंध थी। काम करने वाली मेज़ पर लकड़ी का एक डिब्बा खुला रखा था। “हमें जो चाहिए, सब यहीं है,” ने कहा। “एक नन्हा-सा क्रिस्टल, एक पेंसिल और एक सेफ़्टी पिन।” आरव मुस्कुरा उठा। “कोई बैटरी नहीं?” “एक भी नहीं,” उन्होंने कहा।


