आरव और त्रिभुजों वाला गोल गुंबद-घर
आयु 6–8
साइंस कैंप की ड्रिल में जब आरव के पास सिर्फ़ अख़बार और पिनें हैं और ऊपर से तूफ़ान आ रहा है, तो उसे कुदरत का सबसे मज़बूत आकार खोजना पड़ता है, ताकि वह ऐसा आसरा बना सके जो गिरे नहीं।

“आज की ड्रिल,” रेंजर अंकल ने आवाज़ लगाई, “जान बचाने वाला आसरा बनाने की है! शाम तक तूफ़ानी बादल आ जाएँगे। हर कैंपर अपना आसरा बनाएगा, और जब बारिश आएगी तो हम सब साथ मिलकर उसमें रुकेंगे।” आरव के पेट में तितलियाँ-सी उड़ने लगीं। उसने ज़मीन के खाली गोल घेरे को देखा और सोचा, ऐसा कौन-सा आकार होगा जो पूरी छत को थाम सके?
“हमें बस अख़बार, पिनें और डोरी ही मिली है,” नेहा ने गिनते हुए कहा, “बारह, तेरह, चौदह पिनें हर एक को!” आरव ने अख़बार के ढीले-ढाले पन्ने को देखकर त्योरी चढ़ाई। “काग़ज़ से छत नहीं टिक सकती,” वह बुदबुदाया। “यह तो बहुत नरम है। इसमें ज़रूर कोई तरकीब होगी।”
आरव ने एक पन्ने को कसकर लपेटकर नली बना ली और उसके सिरे दबा दिए। वह तो सख़्त हो गई, बिल्कुल छोटी-सी लकड़ी की छड़ी जैसी! “देखो नेहा, लपेटने पर यह कितनी मज़बूत हो गई!” वह बोला। “शायद काग़ज़ से ज़्यादा उसके आकार से फ़र्क पड़ता है।”


