अर्जुन और घूमते सिक्के की भूलभुलैया

आयु 6–8

जब अर्जुन एक यूनिवर्सिटी की लैब में जाता है, जहाँ ढेर सारी मशीनें टिमटिमा रही हैं, तो ब्लिप नाम का एक प्यारा रोबोट उसे दिखाता है कि घूमता सिक्का कैसे दो रंगों के बीच अंदाज़ा लगवाता रहता है। फिर दोनों मिलकर सच्चे संयोग और समझदार सोच से एक मुश्किल भूलभुलैया का हल निकाल लेते हैं।

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“लैब में स्वागत है, अर्जुन!” बड़े काँच के दरवाज़े खुलते ही ब्लिप की स्क्रीन-आँखें चमक उठीं। मशीनें गुनगुना रही थीं। हर रंग की बत्तियाँ टिमटिमा रही थीं। “आज,” ब्लिप ने कहा, “हम घूमते सिक्के का खेल खेलेंगे। जानना चाहोगे कि संयोग असल में क्या होता है?” अर्जुन मुस्कुराया और आँखें फाड़े अंदर चला गया।

एक वर्कबेंच पर चाँदी का एक सिक्का रखा था। उसकी एक तरफ़ नीली चमक थी और दूसरी तरफ़ नारंगी। “इस सिक्के के दो चेहरे हैं,” ब्लिप ने कहा, “और रुकने पर सिर्फ़ एक ही दिखेगा। ध्यान से देखो।” अर्जुन ठोड़ी हथेलियों पर टिकाकर आगे झुक गया और देखने लगा कि कौन-सा रंग आएगा।

सिक्का हल्की-सी खनक के साथ गिरा। नीला रंग ऊपर! “यह एक साफ़ जवाब है,” ब्लिप ने कहा। “लेकिन गिरने से ठीक पहले क्या होता है, यह देखो।” अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं। गिरने से ठीक पहले उस ज़रा-सी देर में आख़िर क्या हो सकता था?

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