सान्वी और चौदह दिन वाला तारा
आयु 6–8
जब सान्वी एक दूर के लाल बौने तारे की रोशनी में एक छोटी, बार-बार आने वाली गिरावट देखती है, तो उसे साबित करना होता है कि आँकड़ों में छिपा वह सचमुच एक बिल्कुल नया ग्रह है।

सितारों की रोशनी सान्वी को सबसे ज़्यादा पसंद थी। हर रात स्टारवॉच वेधशाला में वह चमकते ग्राफ़ को हल्की लहरों की तरह सरकते हुए देखती थी। “वहाँ दूर कहीं,” वह फुसफुसाई, “एक तारा अपना राज़ छिपाए बैठा है।” पिप उसके पास खुशी से बीप-बीप कर रहा था, उसका एंटीना नीला जल-बुझ रहा था।
“यहाँ देखो, पिप!” सान्वी ने चमकते ग्राफ़ को हल्के से थपथपाया। एक छोटी-सी गिरावट दिखी, फिर गायब हो गई। “अरे वाह!” पिप चहका, उसका एंटीना तेज़ चमक उठा। “उस तारे ने अभी पलक झपकाई!” “चलो, डॉ. वेगा को बताते हैं,” सान्वी ने कहा। उसके मन में भी उत्साह की हलचल मची थी।
डॉ. वेगा सरकती हुई पास आईं। उनके घुंघराले बाल उछल रहे थे और गोल चश्मा रोशनी में चमक रहा था। “ऐसी गिरावट का मतलब हो सकता है कि तारे के सामने से कुछ गुज़रा,” उन्होंने कहा। “जैसे किसी लैंप के आगे से एक नन्ही परछाईं निकल जाए। कल फिर देखते हैं।” सान्वी मुस्कुराई। वह अभी से घंटे गिनने लगी थी।


