मायरा और बेल हार्बर का तूफ़ान
आयु 6–8
जब सैटेलाइट स्क्रीन पर घूमते बादल दिखाई देते हैं, तो नन्ही मौसम-विज्ञानी मायरा को आसमान के छिपे इशारे समय रहते पढ़ने होंगे, ताकि तूफ़ान का पानी किनारे पर चढ़ आने से पहले वह समुद्र किनारे के शहर को ख़बरदार कर सके।

हर शनिवार मायरा पुराने लाइटहाउस की घुमावदार सीढ़ियाँ चढ़कर बंदरगाह के मौसम-वैज्ञानिक मनोज अंकल से मिलने जाती थी। “आज कोई तूफ़ान है क्या?” उसने अपने चाँदी जैसे मौसम-स्कैनर को थपथपाते हुए पूछा। “आसमान देखो, इशारों पर भरोसा करो,” मायरा बुदबुदाई। यह उसकी अपनी सबसे पसंदीदा कहावत थी। “चलो, सैटेलाइट देखते हैं,” मनोज अंकल ने कहा और चमकती स्क्रीनों की एक पूरी दीवार चालू कर दी। वहाँ दूर समुंदर में सफ़ेद बाद
“यह भँवर एक गर्म समुंदर वाला तूफ़ान है,” मनोज अंकल ने समझाया। “अंतरिक्ष में बहुत ऊपर घूमते सैटेलाइट हर कुछ मिनट में बादलों की तस्वीरें खींचते हैं, जैसे आसमान में लगा कोई कैमरा।” मायरा अपनी हरी-नीली जैकेट पहने आगे झुक गई। खिड़की से आती समुंदर की नमकीन सुबह की हवा उसे महसूस हो रही थी, और वह भँवर और भी सफ़ेद और घना होता जा रहा था। “यह तो बड़ा होता जा रहा है,” उसने धीरे से कहा। बाहर पेपर ने अपने पंख फ
“सैटेलाइट हमें बादल दिखाते हैं,” मनोज अंकल ने कहा, “लेकिन तूफ़ान के अंदर घूमती हवा देखने के लिए हमें ज़मीन वाला रडार भी चाहिए।” वे कंसोल के पीछे गए और दूसरी स्क्रीन चालू कर दी। उस पर इंद्रधनुष की चरखी जैसे घूमते रंग बने हुए थे। “यह डॉप्लर रडार है,” उन्होंने कहा। “यह यहीं ज़मीन पर बैठे-बैठे हवा की आवाज़ सुन लेता है।”


