अनन्या का पवन-चक्की कंट्रोल रूम
आयु 6–8
जब तूफ़ान का एक तेज़ झोंका तटीय पावर ग्रिड को ठप करने का ख़तरा बन जाता है, तो अनन्या एक मॉडल पवन-फ़ार्म बनाती है और वह पैटर्न खोज निकालती है जो पचास असली पवन-चक्कियों को संतुलित रखता है, ताकि शहर की बत्तियाँ जलती रहें।

अनन्या को हवा वाले दिन सबसे ज़्यादा पसंद थे। वह घाट पर खड़ी थी, और उसके हाथ में पीतल का हवा-मापी यंत्र टिक-टिक कर रहा था। दूर खाड़ी में पचास बड़ी-बड़ी पवन-चक्कियाँ घूम रही थीं। “तेज़ हवा यानी ज़्यादा बिजली,” उसने धीरे से कहा। आज हवा बहुत बेकाबू लग रही थी। वह हर पल और तेज़ होती जा रही थी।
लाइटहाउस से भोंपू ज़ोर से बज उठा। नीला बाहर दौड़ी आई और हाथ हिलाकर उसे अंदर बुलाने लगी। “हवा का झोंका बहुत तेज़ है!” वह चिल्लाई। “अगर पवन-चक्कियाँ बहुत तेज़ घूमीं, तो पूरा पावर ग्रिड बंद हो सकता है!” अनन्या का दिल धक-धक करने लगा। उत्साह भी था और घबराहट भी, दोनों एक साथ।
अनन्या हाँफती हुई अंदर भागी। कंट्रोल रूम में हलचल मची थी। स्क्रीनें लाल होकर झपक रही थीं, और दीवार जितने बड़े मॉडल में पचास छोटी पवन-चक्कियाँ बिना तालमेल के बेतहाशा घूम रही थीं। “हमें एक पैटर्न चाहिए,” नीला ने कहा, “ताकि कोई भी पवन-चक्की एक साथ बहुत ज़्यादा हवा न ले।” अनन्या की आँखें ध्यान से फैल गईं।


