सिया और क्षुद्रग्रह की छिपी हुई रोशनी

आयु 6–8

जब एक लुढ़कता हुआ क्षुद्रग्रह सिया के नन्हे विज्ञान-यान के पास आ जाता है, तो वह अपना भरोसेमंद स्पेक्ट्रोमीटर उठाकर उसकी पथरीली चमक में छिपे सुराग ढूँढने निकल पड़ती है, और सीखती है कि सबसे अच्छा सबूत पाने के लिए कभी-कभी थोड़ा और आगे हाथ बढ़ाना पड़ता है।

"सिया और क्षुद्रग्रह की छिपी हुई रोशनी" का कवर

“ऑर्बिट, देखो!” सिया ने अपनी फिट बैठने वाली चाँदी-और-नीले रंग की उड़ान-पोशाक में, जिस पर छोटे-छोटे ग्रहों के बैज लगे थे, गोल खिड़की से अपनी नाक सटा ली। एक स्लेटी-ताँबे रंग का क्षुद्रग्रह धीरे-धीरे लुढ़कता हुआ पास से गुज़रा। उसकी उबड़-खाबड़ सतह पर तारों की रोशनी चमक रही थी। “यह तो इस पूरे हफ़्ते का सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह है।” ऑर्बिट की स्क्रीन झपककर जाग उठी। “चलें पता करें कि यह किस चीज़ का बना है?”

“रोशनी अपने साथ राज़ लेकर चलती है,” सिया ने पीतल का स्पेक्ट्रोमीटर अपनी आँख से लगाते हुए कहा। “जब सूरज की रोशनी किसी चट्टान से टकराकर लौटती है, तो वह उसी चीज़ के रंग में रँगी होती है जिससे चट्टान बनी है।” ऑर्बिट की स्क्रीन गर्व से टिमटिमाई। “रोशनी से बनी उँगलियों की छाप जैसी, और मैं कोई छाप कभी नहीं भूलता!” सिया ने, जिसकी ग्रहों वाली उड़ान-पोशाक चमक रही थी, ध्यान से निशाना साधा और चमकता हुआ बटन दब

स्पेक्ट्रोमीटर गुनगुनाया, फिर खड़खड़ाने लगा। स्क्रीन पर साफ़ पट्टियों की जगह एक उलझा, टेढ़ा-मेढ़ा धब्बा दिखाई दिया। “यह तो ठीक नहीं है,” सिया ने माथे पर बल डालकर बुदबुदाते हुए कहा। ऑर्बिट की स्क्रीन खरखराने लगी। “कैलिब्रेशन गड़बड़ है! बस एक सेकंड... ज़रा दोबारा जाँच लूँ...” वह घबराकर एक छोटे-से चक्कर में घूमने लगा।

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