पीहू और सुनहरी मधुमक्खी का राज़

आयु 6–8

जब पीहू को नदी के किनारे एक अजीब-सा सुनहरा पत्थर मिलता है, तो वह उसके अंदर जमा पाँच करोड़ साल पुराना एक राज़ खोज निकालती है, जो प्राचीन फूलों के बारे में लोगों की जानकारी बदल सकता है।

"पीहू और सुनहरी मधुमक्खी का राज़" का कवर

पीहू नदी के किनारे बैठी थी। उसकी उँगलियाँ ठंडे कंकड़ों को टटोल रही थीं। गले में डोरी से बँधा पीतल का छोटा-सा लेंस हल्के-हल्के झूल रहा था। “चल पिप्पू, आज कुछ बढ़िया मिलना ही चाहिए,” वह धीरे से बोली। पिप्पू की नाक फड़कने लगी और वह सबसे पहले कंकड़ों में घुस गया। उसकी पूँछ उम्मीद के छोटे-से झंडे की तरह हिल रही थी।

पिप्पू दो बार भौंका और कीचड़ में आधे दबे किसी सुनहरे टुकड़े को पंजे से खुरचने लगा। पीहू ने सँभलकर अँगूठे से मिट्टी हटाई। “अरे वाह!” वह चौंककर बोली। “यह तो जमी हुई धूप की किरण जैसा है!” पत्थर उसकी हथेली पर गुनगुना, चिकना और जैसे जीता-जागता लग रहा था।

पीहू दौड़कर काम वाली मेज़ के पास गई, जहाँ डॉ. फेंग कंकड़ छाँट रही थीं। “देखिए, पिप्पू को क्या मिला!” डॉ. फेंग चश्मे के पीछे आँखें चमकाते हुए झुकीं। “यह एम्बर है,” वे बोलीं, “पेड़ का खून, जो जमकर सोना बन गया है। और कभी-कभी इसके अंदर कोई राज़ छिपा होता है।” पीहू की आँखें फैल गईं। भला अंदर कैसा राज़ छिपा होगा?

"पीहू और सुनहरी मधुमक्खी का राज़" का पृष्ठ 1"पीहू और सुनहरी मधुमक्खी का राज़" का पृष्ठ 2"पीहू और सुनहरी मधुमक्खी का राज़" का पृष्ठ 3

अपने बच्चे के नाम और फ़ोटो से बनाएँ · कहानी पुस्तकालय देखें