सिया और फ्रॉस्टवेल का बीज-पुस्तकालय
आयु 6–8
बर्फ़ीले पहाड़ के अंदर, सिया को दुनिया के सबसे दुर्लभ बीजों को हमेशा के लिए ख़राब होने से पहले नमी से बचाने वाला तरीक़ा ख़ुद खोजना है।

सिया ने अपने दस्ताने कसकर खींचे और फ्रॉस्टवेल बीज-पुस्तकालय के अंदर कदम रखा। वहाँ बर्फ़ की दीवारों पर हज़ारों मर्तबान छोटे-छोटे सुनहरे सूरज की तरह चमक रहे थे। “ये दुनिया के सबसे दुर्लभ पुराने बीज हैं,” पिप ने अपना एंटीना हिलाते हुए कहा। “इन्हें सैकड़ों साल तक सूखा और सुरक्षित रहना है, वरना फ़सल-उत्सव में बोने के लिए कुछ नहीं बचेगा!” सिया की आँखें बड़ी-बड़ी हो गईं। “तो चलो, ऐसा कभी न होने दें,” उसन
पहाड़ के अंदर गहराई में हवा इतनी ठंडी थी कि नाक में चुभ रही थी। “शून्य से अठारह डिग्री नीचे,” पिप ने गर्व से बताया। “इतनी ठंड कि बीज लंबी नींद सो जाएँ, लेकिन अगर पानी की एक बूँद भी अंदर घुस आई तो यह ठंड भी काफ़ी नहीं।” सिया ने अपने दस्ताने वाले हाथ आपस में रगड़े। “तो मेरा काम है हर बीज को एकदम सूखा रखना,” उसने कहा और अपना पीतल का छोटा लेंस उठाकर एक छोटी-सी झुर्रीदार फली को ग़ौर से देखा।
“पहले बीज, फिर नाश्ता!” पिप चहका और सिया को बीज-रखवाले की जगह की ओर ले चला। वह वॉल्ट के बड़े दरवाज़े के पास एक आरामदायक कोना था। बर्फ़ की झालर के पीछे से दस्ताने पहने दो हाथ आगे आए और सिया को बीज के पैकेटों की एक ट्रे थमा दी। “अपनी पहली सीलिंग करके देखो, नन्ही बीज-रक्षक,” झालर के पीछे से एक प्यारी-सी आवाज़ आई। सिया मुस्कुराई और काम में जुट गई।


