दिया और हवा में तैरती रोशनी की रिबन

आयु 6–8

दिया अपने साइंस फेयर के डीएनए मॉडल को सचमुच ज़िंदा करना चाहती है, और पाती है कि सही तरह से मोड़ी गई रोशनी आँखों को चकमा देकर जादू जैसा नज़ारा बना सकती है।

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दिया को अटारी का साइंस कोना सबसे ज़्यादा पसंद था। कल स्कूल में बड़ा साइंस फेयर था, और उसका कागज़ का डीएनए मॉडल बस वहीं पड़ा था, सपाट और बेजान। “इसे ज़िंदा करना होगा, पिप,” उसने अपने चाँदी जैसे आतिशी शीशे को थपथपाते हुए कहा। पिप की नीली आँखें झपकीं। “ज़िंदा? ये तो मुश्किल लगता है,” पिप ने बीप किया। क्या दिया सच में ऐसा कर पाएगी?

“पहले रोशनी के साथ खेलते हैं,” दिया ने कहा और मेज़ की दराज़ से तिकोना काँच का प्रिज़्म निकाला। उसने उसे गोल खिड़की के पास उठाया, जहाँ से धूप अंदर आ रही थी। एक नन्ही किरण प्रिज़्म के किनारे पर पड़ी। “ध्यान से देखो, पिप!” जब रोशनी काँच से ठीक से टकराएगी, तो क्या होगा?

मेज़ पर इंद्रधनुष बिखर गया: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, बैंगनी! “वाह!” दिया हैरानी से बोली। “प्रिज़्म ने रोशनी को मोड़कर बिखेर दिया, जैसे रंगों का पंखा खुल गया हो!” पिप का एंटीना खुशी से हिलने लगा। “सच्चा जादू!” पिप ने बीप किया। “जादू नहीं,” दिया मुस्कुराई। “विज्ञान! इसे परिक्षेपण कहते हैं।” पर क्या वह इससे अपना डीएनए तैरा पाएगी?

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